वास्कोडिगामा की तीसरी भारत यात्रा कब हुई थी?
नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम जानेंगे कि वास्कोडिगामा की तीसरी भारत यात्रा कब हुई थी? वास्कोडिगामा तीसरी बार भारत कब आया था? वास्कोडिगामा की मृत्यु कब और कैसे हुई थी? वास्कोडिगामा की तीसरी भारत यात्रा कितनी महत्वपूर्ण थी?
वास्कोडिगामा ने तीसरी बार भारत यात्रा सन् 1524 इस्वी में की थी। यह उसकी तीसरी और अंतिम भारत यात्रा थी। तीसरी बार वह पुर्तगाल की भारत में उपनिवेश बस्ती के वाइसरॉय (राज्यपाल) के रूप में आया था। भारत पहुँचने के कुछ समय पश्चात् मलेरिया हो जाने के कारण दिसंबर 1524 इस्वी में उसकी मृत्यु हो गई। उसके मरने के पश्चात् उसके पार्थिव शरीर को कोच्चि (भारत) में ही दफना दिया गया।
वास्कोडिगामा की यात्रा के महत्वपूर्ण पहलु
वास्कोडिगामा पुर्तगाल के राजकुमार और अन्वेषक हेनरी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सामुद्रिक खोजकर्ता था। जिसने दो महासागरों और तीन महादेशों को पार कर अरब सागर में अरब व्यापारियों और अफ्रीकी साम्राज्य के लोगों से लड़ कर आगे बढ़ा और भारत पहुँचने का साहस किया। भारत आकर अपने साथ लाए पुर्तगाली राज-संदेश तथा उसकी रक्षा के लिए राजा (जा़मोरिन) से युद्ध और सफलता उसके दृढ़-निश्चय का परिचय था।
वास्कोडिगामा के भारत पहुँचने पर अरब और मूर के व्यापारियों के मसालों के व्यापार को काफी नुकसान पहुंचा। इस व्यापार को पाने के लिए वास्कोडिगामा ने एक लम्बी और परिश्रमी यात्रा की, कई लड़ाईयां भी लड़ी, अधिकांश लड़ाईयों में वह अपनी बेहतर बन्दूको की सहायता से सफल भी रहा। जिससे अरब, ईरान, कालीकट जल व्यापार मार्ग कमज़ोर पड़ गया। उसकी इस सफलता के बाद राजा मैनुएल ने भारत सहित पूर्व के कई और मिशन चलाए।
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